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Adhoore Swangon Ke Darmiyan

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नई पीढ़ी के अनिवार्य कवि सुधांशु फ़िरदौस की कविताओं की दुनिया ने अपने बनने के लिए जो रंग चुने हैं, उनमें प्रतीक्षा का रंग सबसे गहरा है। ‘अधूरे स्वाँगों के दरमियान’ में समाई कविताओं में प्रतीक्षा और धैर्य के अमर बिम्ब हैं, प्रेम और स्वप्न के भी। इन कविताओं की... Read More

Description

नई पीढ़ी के अनिवार्य कवि सुधांशु फ़िरदौस की कविताओं की दुनिया ने अपने बनने के लिए जो रंग चुने हैं, उनमें प्रतीक्षा का रंग सबसे गहरा है। ‘अधूरे स्वाँगों के दरमियान’ में समाई कविताओं में प्रतीक्षा और धैर्य के अमर बिम्ब हैं, प्रेम और स्वप्न के भी। इन कविताओं की आधुनिकता एक चिन्तित नागरिक के अकेलेपन, अपराध-बोध और उदासियों से जुड़ी है। इनमें लोक तथा परम्परा की नव-निर्मितियाँ हैं और एक उम्र से एक उम्र की तरफ़ बढ़ती हुई यात्राएँ। चूँकि यह संग्रह तब आ रहा है, जब कवि ने अपना स्वर पा लिया है—इसलिए इसमें वे सारी उधेड़बुनें और बेचैनियाँ; वे सारे सरोकार और इन्तज़ार पाए जा सकते हैं जो एक जगह से दूसरी जगह जाने के सफ़र में सामने आए। इस कविता-संग्रह में कवि ने अपना अब तक का कुछ भी छोड़ा नहीं है, बल्कि वह सब कुछ जोड़ दिया है जिससे हमारा आज का कवि और कवि-समय बनता है। Nai pidhi ke anivarya kavi sudhanshu firdaus ki kavitaon ki duniya ne apne banne ke liye jo rang chune hain, unmen prtiksha ka rang sabse gahra hai. ‘adhure svangon ke daramiyan’ mein samai kavitaon mein prtiksha aur dhairya ke amar bimb hain, prem aur svapn ke bhi. In kavitaon ki aadhunikta ek chintit nagrik ke akelepan, apradh-bodh aur udasiyon se judi hai. Inmen lok tatha parampra ki nav-nirmitiyan hain aur ek umr se ek umr ki taraf badhti hui yatrayen. Chunki ye sangrah tab aa raha hai, jab kavi ne apna svar pa liya hai—isaliye ismen ve sari udhedabunen aur bechainiyan; ve sare sarokar aur intzar paye ja sakte hain jo ek jagah se dusri jagah jane ke safar mein samne aae. Is kavita-sangrah mein kavi ne apna ab tak ka kuchh bhi chhoda nahin hai, balki vah sab kuchh jod diya hai jisse hamara aaj ka kavi aur kavi-samay banta hai.