{"product_id":"थां-तो-घणो-असाम्बो-कीधो-राजस्थानी-ग़ज़ल-संग्रह","title":"थां तो घणो असाम्बो कीधो | राजस्थानी ग़ज़ल संग्रह","description":"\u003cdiv\u003eगजल उर्दू काव्य री लोक चावी-ठावी विधा है। हिन्दी रै सागै-सागै राजस्थानी में भी आ विधा चावी हुई है। जठै कविता सीधी-सीधी बोलै है वठै गजल इसारा सूं घणी मोटी बात आसानी सूं कैय देवै। 'थां तो घणो असाम्बो कीधो' डॉ. गोपाल राजगोपाल रो राजस्थानी गजल संग्रह है। जिण में 75 गजला रो संग्रह है। इण संग्रह में प्रेम अर विरह है तो सागै-सागै जीवण, समाज, बगत अर मिनखां रै मन रो द्वंद्व भी नजर आवै। इणमें रीत-रिवाज सागै आधुनिकता भी है। आ रचना ग्रामीण परिवेस री सामाजिक विसंगतियां कानी ईसारो करै तो दूजी कानी आज रै समाज रो जथारथ चितरण भी करै। कवि री इण रचना में व्यंग्य, हास्य रै सागै-सागै चिन्तन रा भाव भी घणा गैरा है। कवि रो ओ रचाव हास्य रै सागै-सागै अेक सामाजिक सीख भी देवै। कवि रै रचाव में राजस्थानी लोक साहित्य सागै आधुनिक भाव-धारा भी नजर आवै। इण संग्रह में जन-सरोकार सागै मिनखपणा रो सनेसो भी नजर आवै। ओ गजल संग्रह राजस्थानी लोक-छंद री आंचलिक पद्य शैली में है। रचनाकार डॉ. गोपाल राजगोपाल इणमें तुकांत विधान रो भी निर्वाह कर् यो। \u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003e— डॉ. सुरेश सालवी  \u003c\/div\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50742249586925,"sku":null,"price":180.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/Hc0n0lGSBv.jpg?v=1790260120","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%98%e0%a4%a3%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%a7%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}