{"product_id":"samalochak","title":"Samalochak","description":"समालोचक–अगस्त, 1902 मंे जवाहर लाल जैन वैद्य द्वारा प्रकाशित इस मासिक पत्र के प्रथम संपादक गोपालराम गहमरी रहे, फिर जैन वैद्य संपादक बने । स्व– चंद्रधर शर्मा गुलेरी का संपादकीय सहयोग इसे प्राप्त था । यह पत्र 1906 तक निकला । वर्ष भर में इसमें 300 से 460 तक पृष्ठ होते थे । यह पत्र स्वदेशी का पक्षधर था । यह स्वाधीनता का समर्थक था । इसमें ‘यत्र, तत्र, सर्वत्र’, पुस्तक समीक्षा, साक्षात्कार तथा अन्य विषयक लेखादि रहते थे । हिंदी का पहला साक्षात्कार ‘संगीत की धुन : एक संवाद’, इस पत्र के सितंबर, 1905 के अंक में प्रकाशित हुआ था । यह साक्षात्कार संगीत–महारथी विष्णु दिगंबर पुलस्कर से चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने ‘समालोचक’ के प्रतिनिधि के रूप में लिया था ।’ डॉ– अर्जुन तिवारी अपनी शोधपूर्ण पुस्तक ‘हिंदी पत्रकारिता के वृहद इतिहास’ में लिखते हैं, ‘ ‘समालोचक’ (मासिक) सन् 1902 से जयपुर से प्रकाशित हुआ, जिसको पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी तथा गोपालराम गहमरी की कुशल लेखनी का संबल प्राप्त था । पत्र–प्रकाशन के मूल में हिंदी साहित्य की समालोचना के साथ राष्ट्रीय जागरण की भावना को उजागर करना था ।’","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49976914936045,"sku":null,"price":495.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/q4nqs0QoHL.jpg?v=1778841901","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/samalochak","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}