{"product_id":"rukmini-mangal-play-रुक्मिणी-मंगल-पं-राधेश्याम-कथावाचक-रचित-नाटक","title":"Rukmini Mangal | Play | रुक्मिणी मंगल (पं. राधेश्याम कथावाचक रचित नाटक)","description":"\u003cdiv\u003eसन् 1927 में न्यू एल्फ्रेड थियेट्रिकल कंपनी के लिए लिखा गया यह नाटक श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के विवाह की दिव्य कथा को आधार बनाकर केवल धार्मिक अनुराग ही नहीं, बल्कि उस काल के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश को भी सूक्ष्म रूप से प्रतिबिंबित करता है। जहाँ रंगमंचों पर बाज़ारू मनोरंजन का बोलबाला था, वहाँ पं. राधेश्याम ने शुद्ध हिन्दी के माध्यम से आदर्शवादी, नैतिक और राष्ट्रप्रेमी चेतना को स्थापित किया। नाटक की नाट्य-संरचना— तीन अंकों में विभक्त, मंगलाचरण से प्रारंभ होकर मंगल तक पहुँचती है, जिसमें नट सूत्रधार की भूमिका में दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र की महिमा से जोड़ता है और नटी भावुकता के साथ उसकी पावित्र्य की पुष्टि करती है।\u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003eयह नाटक मात्र कृष्ण-रुक्मिणी के प्रेम-विवाह की कथा नहीं, अपितु भक्ति, साहस, प्रतिरोध और सत्य की विजय का प्रतीक है। रुक्मिणी का विद्रोह (अपने विवाह में स्वतंत्र इच्छा का प्रकटीकरण), जरासंध-शिशुपाल जैसे विरोधियों का सामना, और अंत में श्रीकृष्ण के साथ उनका मंगल-संयोग, ये सभी प्रसंग उस दौर की स्वाधीनता-चेतना और स्त्री-स्वातंत्र्य की झलक देते हैं। कथावाचकजी ने पारसी शैली की गीतात्मकता, संवादों की लयबद्धता और दृश्य-परिवर्तन की कुशलता को अपनाते हुए भी हिन्दी की मधुरता और संस्कृतनिष्ठा को बनाए रखा है, जिससे यह नाटक लोकप्रिय होने के साथ-साथ साहित्यिक भी बना।\u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003eहरिशंकर शर्मा द्वारा संपादित यह संस्करण मूल रचना की प्रामाणिकता को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक पाठक के लिए सुगम बनाता है। \u003c\/div\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49742135951597,"sku":null,"price":240.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/YYiiFE7ONj.jpg?v=1775045135","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/rukmini-mangal-play-%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a3%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%95-%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}