{"product_id":"rang-badrang-रंग-बदरंग-उपन्यास","title":"Rang Badrang | रंग बदरंग (उपन्यास)","description":"\u003cspan style=\"color: #0f1111; font-family: 'Amazon Ember', Arial, sans-serif;\"\u003eआरव मिश्रा का उपन्यास ‘रंग बदरंग’ प्रेम, धर्म और सामाजिक विभाजनों की जटिल गाँठ को बड़े सलीके से खोलता है। यह कहानी हिंदू परिवार के गरीब लेकिन संस्कारवान बालक मानक और मुस्लिम परिवार की मासूम, जीवंत रज़िया के बीच पनपते प्रेम को केंद्र में रखकर बुनी गई है, किंतु यह महज एक प्रेम-कथा नहीं है; बल्कि आधुनिक भारत की उस गहरी दरार को उजागर करती है जो धर्म के नाम पर खड़ी की गई दीवारों, रूढ़िवादी मानसिकताओं, लिंग-भेद, शिक्षा की असमानता और वर्गीय संघर्षों से निरंतर चौड़ी होती जा रही है। लेखक ने बचपन की मासूम आँखों से शुरू करके धीरे-धीरे समाज की कट्टरता, परिवार की संकीर्णता और प्रेम की निर्भीकता को सधी हुई भाषा में चित्रित किया है। उपन्यास की भाषा सरल होते हुए भी साहित्यिक गहराई लिए हुए है; बच्चों के निर्दोष संवाद, गरीबी की तीखी सच्चाई और धार्मिक कट्टरता की निरंकुशता को आरव ने बेहद सहजता से उकेरा है। ‘रंग बदरंग’ प्रेम की शाश्वत शक्ति की कहानी है और दीवारें तोड़ने की कोशिश करती है। भले ही वह प्रयास कितना ही दर्दनाक और जोखिम भरा क्यों न हो। उपन्यास पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सचमुच धर्म प्रेम का पुल बन सकता है या फिर हमने उसे हमेशा के लिए एक अतिक्रमण-रेखा बना दिया है।\u003c\/span\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49831118766317,"sku":null,"price":290.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/oITQLfsvCD.jpg?v=1777114778","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/rang-badrang-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}