{"product_id":"pandit-radheshyam-kathawachak-ke-srijan-me-samvad-sampreshan","title":"PANDIT RADHESHYAM KATHAWACHAK KE SRIJAN ME SAMVAD-SAMPRESHAN","description":"\u003cdiv\u003eपं. राधेश्याम कथावाचक हिन्दी नाट्य-साहित्य तथा कथावाचन की परम्परा के उन विरल स्रष्टाओं में से एक हैं, जिन्होंने सम्वाद को मात्र सम्वाद नहीं, बल्कि जन-मानस तक प्रभावी सम्प्रेषण का माध्यम बनाया।\u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003eहरिशंकर शर्मा ने इस पुस्तक में कथावाचक की प्रमुख नाट्य कृतियों में सम्वाद की शिल्पगत सूक्ष्मता, भाषा की लोकप्रियता, रंगमंचीय प्रभावशीलता तथा सामाजिक-राष्ट्रीय चेतना के सम्प्रेषण को गहनता से विश्लेषित किया है। साथ ही यह भी चिह्नित किया है कि कैसे पं. राधेश्याम कथावाचक ने पारसी रंगमंच की परम्परा को हिन्दी में नया रूप देते हुए सम्वाद को जनसुलभ, भावात्मक और प्रेरक बनाया— कभी वीर रस से ओत-प्रोत, कभी हास्य-व्यंग्य से चुभता, कभी भक्ति की गहराई में डुबोता। उनकी रचनाएँ न केवल मंच पर ध्वनित होती थीं, बल्कि दर्शक के मन-मस्तिष्क तक सीधा सम्वाद स्थापित करती थीं। \u003c\/div\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49969329897709,"sku":null,"price":340.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/qZ2OidDfSb.jpg?v=1778647739","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/pandit-radheshyam-kathawachak-ke-srijan-me-samvad-sampreshan","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}