{"product_id":"nij-mann-mukuru-sudhari-nij-mn-mukuru-sudhaari-kvitaa-sngrh","title":"NIJ MANN MUKURU SUDHARI | निज मन मुकुरु सुधारि (कविता-संग्रह)","description":"\u003cspan style=\"color: #0f1111; font-family: 'Amazon Ember', Arial, sans-serif;\"\u003e\"निज मन मुकुरु सुधारि\" की कविताओं में ग्राम्य जीवन की सरलता, रिश्तों की ऊष्मा, और समय के बदलते परिदृश्य के बीच मनुष्य की आंतरिक खोज अपनी मौलिक अभिव्यक्ति पाती है। कमल किशोर पिपलवा की रचनाएँ जहाँ ‘चूल्हा’ और ‘फूस की प्याऊ’ जैसे लुप्तप्राय प्रतीकों में अतीत की स्मृति को जीवित करती हैं, वहीं ‘बदनसीब लड़कों का व्याकरण’ और ‘अष्टांग योग करती स्त्रियाँ’ जैसी कविताओं में समकालीन समाज की विसंगतियों और संघर्षों को गहरी संवेदना के साथ उजागर करती हैं। उनकी भाषा में देशज शब्दों की लय और शास्त्रीय संदर्भों का आधुनिक बोध एक अनूठा समन्वय रचता है। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित यह संग्रह हिंदी कविता की समृद्ध परंपरा में एक सशक्त हस्तक्षेप है। शीघ्र प्रकाश्य यह कृति पाठकों को न केवल आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है, बल्कि एक ऐसी काव्यात्मक यात्रा पर ले जाती है, जहाँ मन का दर्पण स्वयं को सुधारने का संकल्प लेता है।\u003c\/span\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48070994559213,"sku":"kkpiplwa01","price":190.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/34k88IcJGf.jpg?v=1746683411","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/nij-mann-mukuru-sudhari-nij-mn-mukuru-sudhaari-kvitaa-sngrh","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}