{"product_id":"natakkar-dharamveer-bharti","title":"Natakkar Dharamveer Bharti","description":"\u003cdiv style=\"text-align: center;\"\u003e\u003cspan style=\"color: #777777; font-family: Jost, sans-serif; font-size: 16px; letter-spacing: 0.5px; text-align: start;\"\u003eकवि, कथाकार के रूप में ख्यात धर्मवीर भारती एक सफल नाटककार के रूप में भी हमारे सामने आते हैं । ‘नदी प्यासी थी’ उनके चार एकांकी और एक ध्वनिरूपक का संग्रह है । उनको सर्वाधिक प्रसिद्धि % ‘अन्धा युग’ और ‘कनुप्रिया’ से प्राप्त हुई जिसे अपने समय के महत्त्वपूर्ण सभी रंग–निर्देशकों ने मंचित किया । ‘अन्धा युग’ धर्मवीर भारती जी द्वारा 1953–54 में लिखा एक गीति नाट्य है जिसका प्रसारण आकाशवाणी से हुआ । इसे सुनकर विख्यात रंग निदेशक सत्यदेव दुबे बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने इस नाटक को 1962 में खुले मंच में मंचित किया । नाटक की यह स्क्रिप्ट उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक इब्राहिम अल्काजी को भेजी । अल्काजी एनएसडी में जाने के पहले मुम्बई में थियेटर करते थे और एनएसडी डायरेक्टर बनकर दिल्ली जाने पर अपनी नाट्य संस्था की जिम्मेदारी सत्यदेव दुबे जी को सौंपी थी । अल्काजी को भी ‘अन्धा युग’ नाटक इतना पसन्द आया कि उन्होंने उसे पूरी भव्यता के साथ दिल्ली के पुराने किले में प्रस्तुत किया । इस नाट्य मंचन की भव्यता ने हिन्दी रंगमंच में नया अध्याय गढ़ दिया था । महाभारत युद्ध के अन्तिम दिन पर आधारित यह नाटक चार दशक से भारत की प्रत्येक भाषा में मंचित हो रहा है । इब्राहीम अल्काजी, रतन थियम, अरविन्द गौड़, रामगोपाल बजाज, मोहन महर्षि, एम– के– रैना और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशकों ने इसका मंचन किया है ।\u003c\/span\u003e\u003c\/div\u003e","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49738441425133,"sku":"Natakkar Dharamveer Bharti","price":157.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/CCWsLZggeJ.jpg?v=1774956802","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/natakkar-dharamveer-bharti","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}