{"product_id":"devrani-jethani-ki-kahani-2","title":"devrani jethani ki kahani","description":"हिन्दी के प्रथम उपन्यास के रचयिता पंडित गौरीदत्त ने जहां देवनागरी लिपि के प्रचार तथा प्रसार के लिए इतने ग्रन्थ लिखे और अनेक पत्र–पत्रिकाएं सम्पादित कीं वहां आपने सन् 1870 में ‘देवरानी जेठानी की कहानी’ नामक एक उपन्यास भी लिखा । यहाँ यह भी ज्ञातव्य है कि भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र ने हिन्दी गद्य–लेखन सन् 1873 में प्रारंभ किया था । पंडित गौरीदत्त के इस उपन्यास का प्रकाशन सन् 1870 में हुआ था । इससे पूर्व हिन्दी–गद्य में सैयद इंशा अल्ला खाँ की ‘रानी केतकी की कहानी’ (सन् 1800 के आस–पास) नामक पुस्तक ही थी । इससे यह सिद्ध हो जाता है कि हिन्दी का पहला उपन्यास ‘देवरानी जेठानी की कहानी’ ही है । यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हिन्दी के इतिहासकारों के अग्रणी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल तक ने इसकी उपेक्षा करके पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की ‘भाग्यवती’ (प्रकाशन–वर्ष सन् 1877) लाला श्रीनिवासदास की ‘परीक्षा गुरु’ (प्रकाशन–वर्ष 1882) नामक पुस्तकों को अपने ‘हिंदी साहित्य की इतिहास‘ नामक ग्रन्थ में क्रमश% ‘हिन्दी का पहला सामाजिक उपन्यास’ और ‘अंग्रेजी ढंग का पहला हिन्दी उपन्यास’ माना है । इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि इस उपन्यास के प्रकाशन पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर ने ‘सौ रुपए’ का पुरस्कार भी प्रदान किया था । आपके द्वारा अनूदित ‘गिरिजा’ (1904) नामक एक और उपन्यास भी उल्लेखनीय है ।","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49976819253485,"sku":"9789348409928","price":225.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/cjCsDrPosH.jpg?v=1778841416","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/devrani-jethani-ki-kahani-2","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}