Darshan Digdarshan
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| Item Weight | 0.700 |
| ISBN | 978-93-47602-80-1 |
| Author | Rahul Sankrityayan |
| Language | Hindi |
| Publisher | Ananya Prakashan |
| Pages | 559 |
| Dimensions | 22.5X15X4 |
| Publishing year | 2026 |
| Edition | 1st |
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मानव का अस्तित्व पृथ्वी पर यद्यपि लाखों वर्षों से है, किन्तु उसके दिमाग की उड़ान का सबसे भव्य युग 5000-3000 ई. पू. है, जबकि उसने खेती, नहर, सौर पंचांग आदि-आदि कितने ही अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा समाज की कायापलट करने वाले आविष्कार किए। इस तरह की मानव मस्तिष्क की तीव्रता हम फिर 1760 ई. के बाद से पाते हैं, जबकि आधुनिक आविष्कारों का सिलसिला शुरू होता है। किन्तु दर्शन का अस्तित्व तो पहिले युग में था ही नहीं, और दूसरे युग में वह एक बूढ़ा बुजुर्ग है, जो अपने दिन बिता चुका है: बूढ़ा होने से उसकी इज़्ज़त की जाती जरूर है, किन्तु उसकी बात की ओर लोगों का ध्यान तभी खिंचता है, जबकि वह प्रयोगआश्रित चिन्तन साइंस का पल्ला पकड़ता है। यद्यपि इस बात को सर राधाकृष्णन् जैसे पुराने ढर्रे के "धर्म-प्रचारक" मानने के लिए तैयार नहीं हैं, उनका कहना है- "प्राचीन भारत में दर्शन किसी भी दूसरी साइंस या कला का लग्गू-भग्गू न हो, सदा एक स्वतंत्र स्थान रखता रहा है।" भारतीय दर्शन साइंस या कला का लग्गू-भग्गू न रहा हो, किन्तु धर्म का लग्गू-भग्गू तो वह सदा से चला आता है, और धर्म की गुलामी से बदतर गुलामी और क्या हो सकती है? 3000-2600 ई. पू. मानव जाति के बौद्धिक जीवन के उत्कर्ष नहीं अपकर्ष का समय है; इन सदियों में मानव ने बहुत कम नए आविष्कार किए। पहिले की दो सहस्राब्दियों के कड़े मानसिक श्रम के बाद 1000-700 ई. पू. में, जान पड़ता है, मानव-मस्तिष्क पूर्ण विश्राम लेना चाहता था, और इसी स्वप्नावस्था की उपज दर्शन है; और इस तरह का प्रारंभ निश्चय ही हमारे दिल में उसकी इज़्ज़त को बढ़ाता नहीं घटाता है। लेकिन, दर्शन का जो प्रभात है, वहीं उसका मध्याह नहीं है। दर्शन का सुवर्ण युग 700 ई. पू. से बाद की तीन और चार शताब्दियों हैं, इसी वक्त भारत में उपनिषद् से लेकर बुद्ध तक के, और यूरोप में वेल्स से लेकर अरस्तू तक के दर्शनों का निर्माण होता है। यह दोनों दर्शन-धाराएँ आपस में मिलकर विश्व की सारी दर्शन धाराओं का उद्गम बनती हैं-सिकन्दर के बाद किस तरह ये दोनों धाराएँ मिलती हैं, और कैसे दोनों धाराओं का प्रतिनिधि नव-अफलातूनी दर्शन आगे प्रगति करता है, इसे पाठक आगे पढ़ेगें।
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