{"product_id":"bhartendu-mandal","title":"Bhartendu Mandal","description":"\u003cspan style=\"color: #222222; font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;\"\u003eभारतेन्दु और उनके साथ के रचनाकारों ने एक ऐसी नींव रखी, जिस पर आज की आ\/ाुनिक हिन्दी का विशाल महल खड़ा हुआ । उस उर्वर जमीन से विवि\/ा विधाओं की ऐसी अनेक वीथिकाएँ निकली जिस पर आज अनेक महान् रचनाकारों के पद–चिह्नों के अमिट निशान हैं । आज इस कारवाँ से निकलकर अनेक नाम विश्व भाषाओं में अपनी पहचान बना रहे हैं । यह विरासत जितना मूल्यवान है उतना ही जरूरी है कि हम इसे समय–समय पर उटकेरते रहें । जब–जब हमारे पाँव डगमगाये, हम मौजूदा समय में जब भी संकट महसूस करें, हमें अपनी विरासत के पास जाना चाहिए । हमें उन गवाक्षों को ढूँढ़ना चाहिए, जिसके सहारे हमारी मौजूदा उलझनों को सुलझाने में सहूलियत मिल सके इसीलिए उसकी बार–बार प्रस्तुति की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहती है । बाबू ब्रजरत्न दास का ‘भारतेन्दु–मंडल’ उस विरासत की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है ।\u003c\/span\u003e","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49978050216173,"sku":null,"price":157.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/FDv8NIhK61.png?v=1778847764","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/products\/bhartendu-mandal","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}