Are! Ye To Vahi Hai...!
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Item Weight | 400 Grams |
ISBN | 978-9391428907 |
Author | Maheshwar Prasad Singh Alakh |
Language | Hindi |
Publisher | Rajmangal Publishers (Rajmangal Prakashan) |
Pages | 267 |
Book Type | Paperback |
Dimensions | 28*18*4 |
Edition | 1st |

Are! Ye To Vahi Hai...!
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वर्तमान कहानी संग्रह में २९ कहानियां सम्मिलित की गई हैं जो सभी अपनी अलग अलग घटनाओं से प्रेरित हैं और सब की अपनी अलग पहचान है। इस कहानी संग्रह की शीर्षक कथा एक ऐसी वैश्या की कहानी है जो ट्रेन में सफर करते हुए एक नवजवान का सिर अपनी गोद में रख कर पानी पिलाती है जो अपने अंतिम क्षणों में पानी के लिए तड़प रहा होता है। हालांकि वह वैश्या पहले तो अपने धर्म संकट में होती है और समाज द्वारा निर्मित जाति और धर्म व्यवस्था से प्रभावित होती है परंतु बाद में उसका मातृत्व जाग उठता है और ईश्वर का नाम लेते हुए उसे पानी पिला देती है और पानी एक की घूंट पीने के पश्चात ही वह नवजवान उसी की गोद में दम तोड़ देता है। इसकी अगली कहानी “गठबंधन” है जिसमें नायिका की दूसरी शादी उसी के घर में उसके देवर के संग उसके पति और गांव के सभी सम्मानित व्यक्तियों के समक्ष विधिवत कराई जाती है। पति के जीवन काल में और उसकी सहमति से नायिका का दूसरा गठबंधन का एक अनोखा किस्सा है जो समाज को एक नई दिशा देता है। “लॉक डाउन” शीर्षक से अगली कहानी है जिसमें निर्धन गरीब मजदूर की विवशता और पुलिस की द्वारा की गई बर्बरता तथा उसके भ्रष्टाचार की चर्चा की गई है।//div
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