{"title":"Kumbh Chronicles: Stories of Faith","description":"","products":[{"product_id":"kumbh-aitihasik-vangmaya","title":"Kumbh : Aitihasik Vangmaya","description":"‘कुम्भ' से सम्बन्धित आख्यानों, कथाओं, मिथकों, रूपकों-प्रतीकों को समेटते हुए महाभारत एवं पुराणों में उल्लेखों-वर्णनों की विवेचना के पश्चात् प्रयाग के कुम्भ की विशेषता को रेखांकित करते हुए, उज्जैन, नासिक एवं हरिद्वार से अलग इसकी पृथक् पहचान स्थापित की है। ब्रह्मा के यज्ञ से लेकर भारद्वाज-आश्रम पर संगम के साथ ही ‘सरस्वती नदी\/धारा का वैज्ञानिक सच भी रेखांकित किया है। तत्पश्चात भारतीय इतिहास के प्राचीन, मध्ययुगीन एवं आधुनिक कालों में ‘कुम्भ' के विवरणों, दस्तावेजों के पुष्ट प्रमाण पर उसका ऐतिहासिक वर्णन किया है। अखाड़ों, उनके ‘शाही स्नान’ और ‘पेशवाई' को भी ऐतिहासिक तिथियों द्वारा प्रमाण सहित वर्णित किया है। ‘संगम’, ‘प्रयाग’, ‘कुम्भ' के आयोजन के उल्लेख में हिन्दू पुनर्जागरण में शंकराचार्य का महत्त्व और सांस्कृतिक एकता को दर्शाया है। इस पुस्तक का महत्त्व इसलिए भी है कि पूर्व में लिखी सम्बन्धित पुस्तकों का ‘क्रिटीक’ भी सम्मिलित है।","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardbound","offer_id":39876661575842,"sku":null,"price":577.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/v4uAJwTqww_8713e9ec-00cc-4a37-ae32-85c6820c5c70.jpg?v=1680012345"},{"product_id":"bharatiya-kumbh-parv","title":"Bharatiya Kumbh Parv","description":"भारतीय कुम्भ पर्व  - \nयूँ तो पूरा भारत अपनी-अपनी तरह से धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का केन्द्र रहा है, जिसमें भारतवासी प्राचीन काल से ही उत्तर से दक्षिण, दक्षिण से उत्तर, पूर्व से पश्चिम और पश्चिम से पूर्व के और धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों की यात्राएँ करते आये हैं। तीर्थ एकता एवं समरसता का सन्देश देते हैं। नदियाँ हमारी संस्कृति की प्राण हैं। सन्त हमारी सनातनी संस्कृति के आधार हैं। प्रयाग कुम्भ उसी संस्कृति के प्राण और आधार का महाकुम्भ है। यह विश्व का अद्भुत और विशाल पर्यटन स्थल हो गया है। उसका ही वर्णन 'भारतीय कुम्भ पर्व' नामक पुस्तक में दिया है।\n bhartiy kumbh parvyoon to pura bharat apni apni tarah se dharmik evan sanskritik virasat ka kendr raha hai, jismen bharatvasi prachin kaal se hi uttar se dakshin, dakshin se uttar, poorv se pashchim aur pashchim se poorv ke aur dharmik va sanskritik sthlon ki yatrayen karte aaye hain. teerth ekta evan samarasta ka sandesh dete hain. nadiyan hamari sanskriti ki praan hain. sant hamari sanatni sanskriti ke adhar hain. pryaag kumbh usi sanskriti ke praan aur adhar ka mahakumbh hai. ye vishv ka adbhut aur vishal parytan sthal ho gaya hai. uska hi varnan bhartiy kumbh parv namak pustak mein diya hai. \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":43052149407981,"sku":null,"price":121.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/1BpUZ3H7LLAGc1p40IgZzwbU4qaFIPcpN_39547167-ebe7-457e-9979-127d1a16727c.jpg?v=1680016854"},{"product_id":"prayagraj-kumbh-katha","title":"Prayagraj Kumbh-Katha","description":"\u003cp\u003eगंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष लगनेवाले माघमेले, छह वर्ष पर होनेवाले अर्धकुंभ और बारह वर्ष पर पड़नेवाले पूर्ण कुंभ पर्वोत्सव को लक्ष्य कर तीर्थराज प्रयाग की पौराणिकता, गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों की पावनता, यहाँ के पुण्यप्रदायक प्रमुख तीर्थस्थलों, उपतीर्थस्थलों, द्वादशमाधव, परमपुण्यदायक अक्षयवट, पातालपुरी मंदिर, सरस्वती कूप, समुद्रकूप, हंसप्रपत्तन, वासुकि मंदिर, तक्षकेश्वर मंदिर जैसे प्रसिद्ध तीर्थ-कुंडों की पौराणिकता और उनके प्राचीनतम माहात्म्य पर आधारित प्रस्तुत पुस्तक 'प्रयागराज-कुंभ-कथा' एक ऐसी दिग्दर्शिका है, जिसमें प्रयागराज की गौरव-गाथा का मात्र स्मरण किया गया है।यहाँ की पावन भूमि पर अवतरित होनेवाले अन्यान्य देवताओं, तपश्चर्या करनेवाले असंख्य ऋषियों, महर्षियों, मुनियों, साधु, संत, महात्माओं और आस्थावान् श्रद्धालुओं की भक्तिभावना को समुद्धृत करने का उपक्रम किया गया है, जिनकी महिमा का गुणगान पौराणिक ग्रंथों में उपलब्ध है।तीर्थराज प्रयाग में कुंभपर्व पर आनेवाले शंकराचार्यों, महंतों, मठाधीशों, साधु, संतों, स्नानार्थियों और कल्पवासियों की परंपरा, उनकी दिनचर्या और उनके आकर्षक आयोजनों का दर्शनीय वर्णन भी प्रस्तुत पुस्तक के प्रकाशन में प्रमुख रूप से प्रतिपाद्य बनाने का प्रयास किया गया है।महाकुंभ पर एक संपूर्ण पुस्तक।____________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________अनुक्रमआत्मोद्गार —Pgs. 51. प्रयागराज अतीत और वर्तमान : एक परिचय —Pgs. 132. पुराणों में प्रयाग —Pgs. 183. कुंभ-माहात्म्य —Pgs. 244. प्रयाग में कुंभोत्सव और माघ का माहात्म्य —Pgs. 325. गंगा का पौराणिक माहात्म्य —Pgs. 396. प्रयाग में गंगा माहात्म्य —Pgs. 477. यमुना का पौराणिक माहात्म्य —Pgs. 588. प्रयाग में सरस्वती का प्रादुर्भाव —Pgs. 679. कुंभ महापर्व के गौरव—साधु-संत और अखाड़े —Pgs. 7110. प्रयाग का कुंभ महापर्व-2013—एक अनुभव —Pgs. 8211. सरस्वती कूप—एक जिज्ञासा —Pgs. 9312. प्रयाग में अक्षयवट और उसका पौराणिक माहात्म्य —Pgs. 10113. प्रयाग में प्रतिष्ठानपुर के समुद्रकूप और हंसकूप का माहात्म्य —Pgs. 10614. कुंभ के कल्पवासी —Pgs. 11115. प्रयागराज में कल्पवास, विधि और विधान —Pgs. 11516. प्रयाग में पाताल पुरी मंदिर का पौराणिक माहात्म्य —Pgs. 12117. तीर्थराज प्रयाग में वेणी और माधव का माहात्म्य —Pgs. 12918. तीर्थराज प्रयाग में भोगवती एवं वासुकि तीर्थमाहात्म्य —Pgs. 13619. तीर्थराज प्रयाग में तक्षकतीर्थ और कालियहृद् —Pgs. 139\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Hardbound","offer_id":44118554345709,"sku":null,"price":285.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/1545910610.jpg?v=1685775112"},{"product_id":"kumbh-aastha-ka-prateek","title":"Kumbh - Aastha Ka Prateek","description":"\u003cp\u003eकुंभ भारतीय समाज का ऐसा पर्व है, जिसमें हमें एक ही स्थान पर पूरे भारत के दर्शन होते हैं—लघु भारत एक स्थान पर आकर जुटता है और हम सगर्व कहते हैं कि महाकुंभ विश्व का सबसे विशाल पर्व है। कुंभ की ऐतिहासिक परंपरा में देश व समाज को सन्मार्ग पर लाने के लिए ऋषियों, महर्षियों के विचार सदैव आदरणीय और उपयोगी रहे हैं। आर्यावर्त के पुराने नक्शे में शामिल देश भी तब महाकुंभों में एकत्र होकर समाज के जरूरी नीति-नियमों को,  तत्कालीन शासकों को जानने के लिए ऋषियों की ओर देखते थे और उसके पालन के लिए प्रेरित होते थे। हर बारह वर्ष बाद देश के विभिन्न स्थलों पर शंकराचार्यों के नेतृत्व में हमारे मनीषी देश की नीति और नियम को तय कर समाज संचालित करते थे। ये नियम सनातन परंपरा को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ समय की माँग के अनुसार भी बनते थे। आज मानव समाज के सामने जो समस्याएँ चुनौती बनकर खड़ी हैं, उनमें आतंकवाद, भ्रष्टाचार, हिंसा और देशद्रोह के समान मानव को जर्जर कर देनेवाली समस्या है पर्यावरण प्रदूषण। प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है, कभी-कभी तो श्वास लेना भी कठिन जान पड़ता है। कुंभ का सबसे बड़ा संदेश पर्यावरण का संरक्षण करना है।ज्ञान, भक्ति, आस्था, श्रद्धा के साथ-साथ जनमानस में सामाजिक-नैतिक चेतना जाग्रत् करनेवाले सांस्कृतिक अनुष्ठान 'कुंभ' पर एक संपूर्ण सांगोपांग विमर्श है यह पुस्तक।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Hardbound","offer_id":44118610575597,"sku":null,"price":380.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/1420531287.jpg?v=1685778581"},{"product_id":"kumbh-manthan-ka-mahaparva","title":"Kumbh : Manthan Ka Mahaparva","description":"\u003cp\u003eकुंभ भारतीय समाज का ऐसा पर्व है, जिसमें हमें एक ही स्थान पर पूरे भारत के दर्शन होते हैं—लघु भारत एक स्थान पर आकर जुटता है और हम सगर्व कहते हैं कि महाकुंभ विश्व का सबसे विशाल पर्व है। कुंभ की ऐतिहासिक परंपरा में देश व समाज को सन्मार्ग पर लाने के लिए ऋषियों, महर्षियों के विचार सदैव आदरणीय और उपयोगी रहे हैं। आर्यावर्त के पुराने नक्शे में शामिल देश भी तब महाकुंभों में एकत्र होकर समाज के जरूरी नीति-नियमों को, तत्कालीन शासकों को जानने के लिए ऋषियों की ओर देखते थे और उसके पालन के लिए प्रेरित होते थे। हर बारह वर्ष बाद देश के विभिन्न स्थलों पर शंकराचार्यों के नेतृत्व में हमारे मनीषी देश की नीति और नियम को तय कर समाज संचालित करते थे। ये नियम सनातन परंपरा को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ समय की माँग के अनुसार भी बनते थे। आज मानव समाज के सामने जो समस्याएँ चुनौती बनकर खड़ी हैं, उनमें आतंकवाद, भ्रष्टाचार, हिंसा और देशद्रोह के समान मानव को जर्जर कर देनेवाली समस्या है पर्यावर��� प्रदूषण। प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है, कभी-कभी तो श्वास लेना भी कठिन जान पड़ता है। कुंभ का सबसे बड़ा संदेश पर्यावरण का संरक्षण करना है।ज्ञान, भक्ति, आस्था, श्रद्धा के साथ-साथ जनमानस में सामाजिक-नैतिक चेतना जाग्रत् करनेवाले सांस्कृतिक अनुष्ठान 'कुंभ' पर एक संपूर्ण सांगोपांग विमर्श है। यह पुस्तक।__________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________अनुक्रमसंपादकीय : मंथन तो हमारे मन के भीतर होता ही रहता है—7भारतीय लोकतंत्र : मान्यताएँ एवं विशेषताएँ1. लोकतांत्रिक संस्कृति की जड़ें कमजोर  होती जा रही हैं—संजय चतुर्वेदी—172. जनप्रतिनिधि यों को जनता की  अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा—डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे—223. राजनीति में आने का उद्देश्य बदलना होगा—डॉ. सुभाष कश्यप—264. समय के साथ-साथ परिभाषाओं को भीबदलने की जरूरत—डॉ. गिरीश नारायण पांडे—30 असहिष्णुता : एक मिथक5. सम्मान वापस करना विरोध नहीं,  बल्कि देश का अपमान—संजय चतुर्वेदी—356. मीडिया के षड्यंत्र को भी समझना होगा—श्री सुरेश चव्हाणके—407. हमारी सहनशीलता का नाजायजफायदा उठाया गया—मेजर जनरल जी.डी. बख्शी—468. 'असहिष्णुता' शब्द को गढ़कर दुरुपयोगकिया गया है—योग गुरु स्वामी रामदेवजी महाराज—49वर्तमान भारत के विकास मेंएकात्म मानव दर्शन की भूमिका9. हम भारतीय संस्कृति के तत्त्वों पर विचार करें—संजय चतुर्वेदी—5710. भारत का स्वभाव एकात्म ​का स्वभाव है—आलोक कुमार—6311. आज समाज में विचारधारा का लोप हो गया है——निशिकांत दुबे—6812. भारत की पहचान इसकी सनातनता से है——महामहिम राज्यपाल कप्तानसिंह सोलंकी—73भारतीय संस्कृति के विकास में गंगा13. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की केंद्र है गंगा—संजय चतुर्वेदी—8114. गंगा निर्मल के साथ-साथ अविरल भी हो—उमाश्री भारती—8615. गंगा ने देश की संस्कृति औरपरंपराओं को जीवित रखा—डॉ. कृष्ण गोपाल—10216. नदियाँ हमारी प्राणरेखा हैं,कोई कूड़ादान नहीं—महामहिम रामनाथ कोविंद—11217. सामाजिक समरसता का संदेश देती है गंगा——पूज्य संत विजय कौशलजी महाराज—116विश्व शांति एवं जेहादी मानसिकता18. हर नागरिक को भारतीय बनकर लड़ना होगा—संजय चतुर्वेदी—12319. जेहाद और विश्व शांति का संघर्ष है—श्री प्रेम शुक्ल—12620. जेहादी मानसिकता : भोग-विलासियों कीगुमराह सोच—डॉ. कुसुमलता केडिया—13921. ताकत विचारों में होती है——डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'—142\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Hardbound","offer_id":44118610608365,"sku":null,"price":285.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/61DrxEQ_aTL._SY445_SX342.jpg?v=1737453772"},{"product_id":"vishwa-dharohar-mahakumbh","title":"Vishwa Dharohar Mahakumbh","description":"\u003cp\u003eभारतीयों के प्रत्येक पर्व और त्योहार की नींव किसी ठोस वैज्ञानिक और तार्किक आधार पर रखी गई है। इन सभी पर्वों और त्योहारों की जड़ में कुछ-न-कुछ वैज्ञानिक रहस्य अवश्य होता है, जो आत्मशुद्धि और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक होता है।मनोविज्ञान के पारखी हमारे ऋषि-मुनियों ने तीर्थों-पर्वों की ऐसी व्यवस्था बनाई कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक देश के कोने-कोेने से लोग इन तीर्थ-पर्वों में आकर अपनी संस्कृति का साक्षात्कार करने के साथ-साथ शांति, सद्भाव और बंधुत्व के एक सूत्र में बँध सकें।कुंभ पर्व मानव जीवन में आलोक और अंतःचेतना का संचार करनेवाला एक ऐसा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम है, जो राष्ट्रचेतना और अखंडता के साथ ही आध्यात्मिक चेतना का आधार स्तंभ भी है। मानव और मानवता के एकात्म हो जाने का महापर्व है महाकुंभ।विश्व कल्याण और मानव हितार्थ गोष्ठियों और कार्यशाला के रूप में शुरू हुआ यह क्रम वैदिक काल के पूर्व से चला आ रहा है, वह भी बिना किसी आ��ंत्रण-निमंत्रण या बिना किसी लोभ-लालच के।महाकुंभ का माहात्म्य और इसके सांस्कृतिक गौरव का बोध करानेवाली पठनीय पुस्तक।____________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________अनुक्रमभूमिका —Pgs. 5अपनी बात —Pgs. 91. कुंभ : अनमोल मानवीय विरासत —Pgs. 172. माँ गंगा की अनुपम देन 'कुंभ'  —Pgs. 203. गंगा की व्युपत्ति और महत्ता —Pgs. 244. इसलिए पड़ा 'कुंभ' नाम —Pgs. 285. मानवता का कालजयी उपक्रम —Pgs. 316. आस्था एवं राष्‍ट्र-चिंतन का दुर्लभ समागम —Pgs. 347. पाठशाला ही नहीं, कार्यशाला भी है —Pgs. 378. सदियों पुरानी सांस्कृतिक महायात्रा —Pgs. 399. अंतःस्नान का भी महापर्व —Pgs. 4110. लोक-परलोक को जोड़ता 'कुंभ' —Pgs. 4411. सार्थक जीवन जीने की कला —Pgs. 4712. हरिद्वार बिना 'कुंभ' अधूरा —Pgs. 4913. कुंभनगरी है हरिद्वार —Pgs. 5214. इसलिए मनाया जाने लगा अर्धकुंभ —Pgs. 5515. चार प्रमुख कुंभ स्थल —Pgs. 5816. विविध स्थानों पर कुंभ —Pgs. 6317. पुराणों से जुड़े हैं 'कुंभ' के सूत्र —Pgs. 6618. स्वर्णाक्षरों में दर्ज कुंभ 2010 —Pgs. 6819. महा​ि‍शवरात्रि स्नान बना इतिहास —Pgs. 7320. निर्मल अविरल गंगा अगला पड़ाव —Pgs. 7721. अद्‍भुत है 'कुंभ' आयोजन परंपरा —Pgs. 8022. अखाड़ों के लिए प्रस्थान से होता है 'कुंभ' का आगाज —Pgs. 8423. अखाड़ों के बिना 'कुंभ' अधूरे —Pgs. 8624. कुल तेरह अखाड़े हैं देश भर में —Pgs. 8925. धर्मरक्षा का स्व​ि‍र्णम इतिहास —Pgs. 10026. हरिद्वार पहली कुंभ नगरी —Pgs. 10427. तीनों शक्तियों का गढ़ हरिद्वार —Pgs. 10728. पौराणिक काल की है कुंभनगरी  —Pgs. 11229. हरिद्वार में सिंधु सभ्यता के भी प्रमाण —Pgs. 11530. कुंभ की व्यापकता —Pgs. 13331. बड़ा व्यापक है कुंभ नाम —Pgs. 13832. कुंभ एक विराट् लोक-दर्शन —Pgs. 14233. मनी​ि‍षयों की नजर में कुंभ —Pgs. 15334. 'समुद्र-मंथन' को मान्यता —Pgs. 15735. लोककथाओं में कुंभ —Pgs. 16036. 'कुंभ स्नान' का विशेष महत्त्व —Pgs. 16437. विज्ञान संगत है '​कुंभ' —Pgs. 16938. आज और भी प्रासंगिक है 'कुंभ' —Pgs. 17239. सागर मंथन : एक बड़ी सीख —Pgs. 17540. पर्व-महोत्सव हमारी धरोहर —Pgs. 17941. आकाश ही ब्रह्म‍ा का कमंडलु है —Pgs. 182\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Hardbound","offer_id":44118647013613,"sku":null,"price":380.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/1546584762.jpg?v=1685780879"},{"product_id":"bharat-me-kumbh","title":"Bharat Me Kumbh (Hindi)","description":"","brand":"National Book Trust,India","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46215663354093,"sku":null,"price":390.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/978-93-5491-795-0_F_31a2a1a2-1420-4da9-9872-eff46361b598.jpg?v=1716200389"},{"product_id":"the-divine-kumbh-echoes-of-eternity-ganga-shipra-godavari-and-sangam","title":"The Divine Kumbh: Echoes of Eternity: Ganga, Shipra, Godavari, and Sangam","description":"\u003cspan style=\"color: #0f1111; font-family: 'Amazon Ember', Arial, sans-serif;\"\u003eThe Divine Kumbh offers a rare and immersive exploration of the Kumbh Mela, the world’s largest religious gathering, where millions of pilgrims converge on India’s sacred rivers every 12 years. This beautifully illustrated book delves into the ancient mythology, vibrant rituals, and profound spirituality that define the event. From the Naga sadhus’ radical quest for salvation to the rich cultural traditions of the akharas, The Divine Kumbh takes readers on a journey through heritage, devotion and purification. It highlights the timeless essence of the Mela, while also exploring the modern-day innovations that have transformed the event into a global phenomenon. With historical insights and vivid imagery, it offers an in-depth look at one of humanity’s most significant spiritual traditions, inviting readers to experience the magic and power of the Kumbh Mela firsthand. This is a must-read for anyone seeking to understand the heart of India’s spiritual soul. About the Author:Deepak Kumar Sen is a senior journalist and professional photographer. He has worked with major media organisations like The Press Trust of India, Dainik Jagran, Sahara Samay, and is a regular columnist for various reputed newspapers. He holds a Master’s degree in History, a Master’s in Hindi Literature, and a Postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication. He produced a documentary titled Kumbh Ka Vigyan (The Science behind Kumbh) for Vigyan Prasar, which was featured at the National Science Film Festival and Competition in 2015. Currently, Deepak is involved in New Media and Digital Media as a mediapreneur. His hometown is Allahabad (now known as Prayagraj), with his home situated near the Sangam.\u003c\/span\u003e","brand":"Niyogi Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47623745667309,"sku":"","price":679.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/v8CRFB51TZ.jpg?v=1736846519"}],"url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/hi\/collections\/kumbh-chronicles-stories-of-faith.oembed","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}