Numaainda Kahaaniyaan Premchand

Premchand

Rs. 199.00

उर्दू और हिंदी कहानी के शीर्ष-पुरुष धनपत राय श्रीवास्तव ‘प्रेमचंद’ 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के लमही गाव में, एक कायस्थ परिवार में पैदा हुए| उन्होंने उर्दू और हिंदी कथा-साहित्य को ख़याली और काल्पनिक क़िस्सों के माहौल से निकाल कर एक नए यथार्थ की ज़मीन पर स्थापित किया...

Description
उर्दू और हिंदी कहानी के शीर्ष-पुरुष धनपत राय श्रीवास्तव ‘प्रेमचंद’ 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के लमही गाव में, एक कायस्थ परिवार में पैदा हुए| उन्होंने उर्दू और हिंदी कथा-साहित्य को ख़याली और काल्पनिक क़िस्सों के माहौल से निकाल कर एक नए यथार्थ की ज़मीन पर स्थापित किया और इस तरह कहानी के एक नए युग की शुरूआ’त हुई| कहानीकार होने के साथ ही एक विचारक की हैसियत से भी उन्होंने बहुत प्रभावशाली भूमिका निभाई| 
उन्होंने सेवा-सदनप्रेमाश्रमरंगभूमि,निर्मलाग़बनकर्मभूमिगोदान सहित लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफनपूस की रातपंच परमेश्वरबड़े घर की बेटीबूढ़ी काकीदो बैलों की कथा सहित तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनमें से अधिकांश हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमुख उर्दू और हिन्दी पत्रिकाओं ज़मानासरस्वतीमाधुरीमर्यादाचाँदसुधा आदि के लिए लिखा। उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन भी किया। वो फ़िल्म-लेखन के लिए मुम्बई भी गए मगर वहाँ के माहौल से निराश होकर वापस आ गए| सारी ज़िन्दगी साहित्य-साधना को समर्पित रहने वाले प्रेमचंद ने 08 अक्तूबर, 1936 को आख़िरी साँस ली|