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Aakhri Paher Ki Dastak

Shamim Hanafi

Rs. 249.00 Rs. 199.00

About Book शमीम हनफ़ी की ग़ज़लें अँधेरे और परछाईं, रंगों के ढलने, भारी पलकें और दुखों की बात करती हैं, लेकिन कभी वैराग्य की बात नहीं करतीं। उनकी ग़ज़लें एक भावनात्मक दृश्य को उकेरती हैं जिसका एक हिस्सा कई बार वो ख़ुद भी होते हैं। शमीम हनफ़ी अपने शब्दों को... Read More

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About Book

शमीम हनफ़ी की ग़ज़लें अँधेरे और परछाईं, रंगों के ढलने, भारी पलकें और दुखों की बात करती हैं, लेकिन कभी वैराग्य की बात नहीं करतीं। उनकी ग़ज़लें एक भावनात्मक दृश्य को उकेरती हैं जिसका एक हिस्सा कई बार वो ख़ुद भी होते हैं। शमीम हनफ़ी अपने शब्दों को गहरे गहरे रंगों में रंगते हैं। उनके विचारों को समझने के लिए गहराई में तैरने की जरूरत है। `आख़िरी पहर की दस्तक` उर्दू भाषा के प्रसिद्ध साहित्यालोचक `शमीम हनफ़ी` की आख़िरी कृति है। उनकी काव्य-रचना की दुनिया में परम्परा की लगातार अन्तर्ध्वनियाँ हैं और नयी रंगतें भी। कविता की सीमाओं का तीख़ा अहसास भी उनके यहाँ हैं।

 

About Author

Shamim Hanafi is one of the most respected literary critics, playwrights, and poets of India. A former academic at the Department of Urdu at Jamia Millia Islamia in New Delhi, he has also been the editor of its prestigious magazine, Jamia. He has authored a number of respectable books in literary criticism. Some of these that need mention include Jadidiyat ki Falsafiyana Asaas; Nayi Sheri Riwayat; Tareekh, Tehzeeb aur Takhleequi Tajurba; Urdu Culture aur Taqseem ki Riwayat; Khayal ki Musaafat; and Qari Say Mukalma. He has also written four plays, translated four books, and brought out four books for children which he admits of enjoying immensely. Hanfi’s poetry collection Aakhiri Pehar ki Dastak was published by Rekhta, one of its first ventures in publishing, in 2015. A not-so-known fact about Hanafi is that he maintains a keen interest in painting, pottery and the performing arts.