Andekhe Anjaan Pul

Rs. 60

भूरे लोगों के इस भारतीय समाज में स्त्री को कई अपमानजनक परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है। विवाह की पहली शर्त है–उसका गोरा होना। लड़की यदि काली, कुरूप हुई तो अस्वीकार का कोड़ा लहराने लगता है। क्या काली लड़की को सपने देखने का हक़ नहीं है? इस उपन्यास की नायिका निन्नी... Read More

Description

भूरे लोगों के इस भारतीय समाज में स्त्री को कई अपमानजनक परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है। विवाह की पहली शर्त है–उसका गोरा होना। लड़की यदि काली, कुरूप हुई तो अस्वीकार का कोड़ा लहराने लगता है। क्या काली लड़की को सपने देखने का हक़ नहीं है? इस उपन्यास की नायिका निन्नी कालापन और कुरूपता के बावजूद सपनों में निकट के सागर को देखती है, लेकिन निन्नी के छूते ही सपने में बनी बर्फ़ की मूर्ति गल जाती है। जबकि दूर का और लगभग अनजाने दर्शन द्वारा समानता और स्नेह से दिया गया चुम्बन एक पुल बन जाता है। प्रख्यात कथाकार का यह उपन्यास स्त्री-जीवन को समानता की गरिमा देने पर बल देता है। Bhure logon ke is bhartiy samaj mein stri ko kai apmanajnak parikshaon se guzarna padta hai. Vivah ki pahli shart hai–uska gora hona. Ladki yadi kali, kurup hui to asvikar ka koda lahrane lagta hai. Kya kali ladki ko sapne dekhne ka haq nahin hai? is upanyas ki nayika ninni kalapan aur kurupta ke bavjud sapnon mein nikat ke sagar ko dekhti hai, lekin ninni ke chhute hi sapne mein bani barf ki murti gal jati hai. Jabaki dur ka aur lagbhag anjane darshan dvara samanta aur sneh se diya gaya chumban ek pul ban jata hai. Prakhyat kathakar ka ye upanyas stri-jivan ko samanta ki garima dene par bal deta hai.