{"title":"Dr. Kumar Vishwas Books","description":"\u003cp\u003eDr. Kumar Vishwas Books showcase the vibrant and emotional poetry of one of India’s most popular contemporary poets. His writings beautifully blend romance, patriotism, and philosophy, making them relatable to readers of all ages. Known for his captivating style and powerful performances, Dr. Vishwas brings traditional Hindi and Urdu poetic sensibilities into a modern voice. His books inspire love, hope, and self-expression, reflecting the emotions of everyday life through rhythmic and heartfelt verses that continue to connect deeply with poetry lovers across the world.\u003c\/p\u003e","products":[{"product_id":"phir-meri-yaad","title":"Phir Meri Yaad","description":"\u003cp\u003e‘कोई दीवाना कहता है’ काव्य-संग्रह के प्रकाशन के 12 वर्षों बाद प्रकाशित हो रहा ‘फिर मेरी याद’ कुमार विश्वास का तीसरा काव्य-संग्रह है। इस संग्रह में गीत, कविता, मुक्तक, क़ता, आज़ाद अशआर— सबकी बहार है।\n\u003cbr\u003e“कुमार विश्वास के गीत ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ के सांस्कृतिक दर्शन की काव्यगत अनिवार्यता का प्रतिपादन करते हैं। कुमार के गीतों में भावनाओं का जैसा सहज, कुंठाहीन प्रवाह है, कल्पनाओं का जैसा अभीष्ट वैचारिक विस्तार है तथा इस सामंजस्य के सृजन हेतु जैसा अद्भुत शिल्प व शब्दकोष है, वह उनके कवि के भविष्य के विषय में एक सुखद आश्वस्ति प्रदान करता है।” \n\u003cbr\u003e—डॉ. धर्मवीर भारती\n\u003cbr\u003e “डॉ. कुमार विश्वास उम्र के लिहाज़ से नए लेकिन काव्य-दृष्टि से ख़ूबसूरत कवि हैं। उनके होने से मंच की रौनक बढ़ जाती है। वह सुन्दर आवाज़, निराले अन्‍दाज़ और ऊँची परवाज़ के गीतकार, ग़ज़लकार और मंच पर क़हक़हे उगाते शब्दकार हैं। कविता के साथ उनके कविता सुनाने का ढंग भी श्रोताओं को नई दुनिया में ले जाता है। गोपालदास नीरज के बाद अगर कोई कवि, मंच की कसौटी पर खरा लगता है, तो वो नाम कुमार विश्वास के अलावा कोई दूसरा नहीं हो सकता है.” \n\u003cbr\u003e—निदा फ़ाज़ली\n\u003cbr\u003e “डॉ. कुमार विश्वास हमारे समय के ऐसे सामर्थ्यवान गीतकार हैं, जिन्हें भविष्य बड़े गर्व और गौरव से गुनगुनाएगा।” \n\u003cbr\u003e—गोपालदास ‘नीरज’                                                                                                                                                                                                                                                       ‘koi divana kahta hai’ kavya-sangrah ke prkashan ke 12 varshon baad prkashit ho raha ‘phir meri yad’ kumar vishvas ka tisra kavya-sangrah hai. Is sangrah mein git, kavita, muktak, qata, aazad ashar— sabki bahar hai. “kumar vishvas ke git ‘satyam shivam sundram’ ke sanskritik darshan ki kavygat anivaryta ka pratipadan karte hain. Kumar ke giton mein bhavnaon ka jaisa sahaj, kunthahin prvah hai, kalpnaon ka jaisa abhisht vaicharik vistar hai tatha is samanjasya ke srijan hetu jaisa adbhut shilp va shabdkosh hai, vah unke kavi ke bhavishya ke vishay mein ek sukhad aashvasti prdan karta hai. ”\n\u003cbr\u003e—dau. Dharmvir bharti\n\u003cbr\u003e“dau. Kumar vishvas umr ke lihaz se ne lekin kavya-drishti se khubsurat kavi hain. Unke hone se manch ki raunak badh jati hai. Vah sundar aavaz, nirale an‍daz aur uunchi parvaz ke gitkar, gazalkar aur manch par qahaqhe ugate shabdkar hain. Kavita ke saath unke kavita sunane ka dhang bhi shrotaon ko nai duniya mein le jata hai. Gopaldas niraj ke baad agar koi kavi, manch ki kasauti par khara lagta hai, to vo naam kumar vishvas ke alava koi dusra nahin ho sakta hai. ”\n\u003cbr\u003e—nida fazli\n\u003cbr\u003e“dau. Kumar vishvas hamare samay ke aise samarthyvan gitkar hain, jinhen bhavishya bade garv aur gaurav se gunagunayega. ”\n\u003cbr\u003e—gopaldas ‘niraj’\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":37520014606498,"sku":null,"price":290.0,"currency_code":"INR","in_stock":false},{"title":"Hardbound","offer_id":43977096986861,"sku":null,"price":290.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/3zZ43KASRg_83bcc8bd-3a5e-4d6d-92df-332ba76fb301.jpg?v=1679995054"},{"product_id":"braj-va-kauravi-lokgeeton-mein-lokchetna","title":"Braj Va Kauravi Lokgeeton Mein Lokchetna","description":"लोकगीत हमारी व्यक्तिगत अनुभूतियों, इतिहास, भूगोल, पर्यावरण, धर्म और संस्कृति आदि की गहरी समझ के अलावा सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना का लोक भाषाओं में सरलतम रूपान्तरण हैं। इसीलिए वे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करते रहे हैं। लोकगीत कभी शीतल फुहारों से मन को गुदगुदाते हैं, तो कभी ग़ुलामी, अन्याय, अत्याचार और बुराइयों के ख़िलाफ़ चिनगारियाँ जगाते हैं। इसीलिए वे राजनीतिक-सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनते हैं। हम आधुनिकता के नशे में अपने पुरखों की इस धरोहर को भुलाते जा रहे हैं। इसे बचाना और बढ़ाना साहित्य, समाज और राष्ट्र की बहुत बड़ी सेवा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मेरे प्रिय अनुज कुमार विश्वास जी एक पूरी पीढ़ी के सबसे लोकप्रिय कवि होने के साथ-साथ साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक विषयों के गम्भीर अध्येता और मौलिक व्याख्याता भी हैं। कई वर्षों के शोध और अथक परिश्रम से लिखी गयी पुस्तक ‘ब्रज व कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना’ इसी का एक और उदाहरण है, जिसके लिए उन्हें अनेकशः साधुवाद। यह पुस्तक साहित्यप्रेमियों, संस्कृतिकर्मियों और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए एक अमूल्य उपहार साबित होगी। -कैलाश सत्यार्थी नोबेल शान्ति पुरस्कार सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता \/ भारतीय संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि परिवर्तन के हर युग में अपने मूल स्वरूप को किसी-न-किसी रूप में सुरक्षित रख सकी है, फिर चाहे वह आज भी पूजित उच्चारित वैदिक ऋचाएँ हों या हमारा जीवन दर्शन समाहित किये हुए लोकगीत, लोककथाएँ या कहावतें। डॉ. कुमार विश्वास हापुड़ में जन्मे और कौरवी भूमि ही उनकी कर्मभूमि रही है। कुमार विश्वास के कवितापाठ में मैंने लोक की छाप देखी है, लोक जैसी सहजता, और हमारे सहेजते हुए बढ़ने वाली चेतना! वे जन-जन के प्रिय कवि कैसे बने, इसकी बुनियाद में उनका अद्भुत लोक अध्ययन झलकता है, लोक के प्रति श्रद्धा और चिन्ता भाव परिलक्षित होता है। -मालिनी अवस्थी पद्मश्री अलंकृत सुप्रसिद्ध लोक गायिका","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardbound","offer_id":39747081994402,"sku":null,"price":460.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/Nmjof8qxSh_dab2e0c0-ddef-4604-991d-2b1bf528fcc0.jpg?v=1680007639"},{"product_id":"braj-va-kauravi-lokgeeton-mein-lokchetna-1","title":"Braj Va Kauravi Lokgeeton Mein Lokchetna","description":"लोकगीत हमारी व्यक्तिगत अनुभूतियों, इतिहास, भूगोल, पर्यावरण, धर्म और संस्कृति आदि की गहरी समझ के अलावा सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना का लोक भाषाओं में सरलतम रूपान्तरण हैं। इसीलिए वे जीवन के हर पहलू को 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सामंजस्य के सृजन हेतु जैसा अद्भुत शिल्प व शब्दकोश है, वह उनके कवि के भविष्य के विषय में एक सुखद आश्वस्ति प्रदान करता है।\\n\\n- स्व० डॉ. धर्मवीर भारती\\n\\nडॉ० कुमार विश्वास उम्र के लिहाज से नये लेकिन काव्य-दृष्टि से खूबसूरत कवि हैं। उनके होने से मंच की रौनक बढ़ जाती है। वह सुन्दर आवाज़, निराले अंदाज और ऊँची परवाज़ के गीतकार, ग़ज़लकार और मंच पर कहकहे उगाते शब्दकार हैं। कविता के साथ उनके कविता सुनाने का ढंग भी श्रोताओं को नयी दुनिया में ले जाता है। गोपाल दास नीरज के बाद अगर कोई कवि, मंच की कसौटी पर खरा लगता है, तो वो नाम कुमार विश्वास के अलावा दूसरा नहीं हो सकता।\\n\\n- निदा फाज़ली\\n\\nडॉ० कुमार विश्वास हमारे समय के ऐसे सामर्थ्यवान गीतकार हैं, जिन्हें भविष्य बड़े गर्व और गौरव से गुनगुनाएगा।\\n\\n-गोपालदास 'नीरज'\\n\\nआँखों में गज़ब का सम्मोहन, मंच पर जबरदस्त पकड़, गीतों में बाँध लेने वाली रसमयता, समय-अवसर के अनुकुल स्मरण-शक्ति और वाल्मीकि रामायण से लेकर राधेश्याम रामायण तक का विराट ज्ञानकोष, इन सब चीजों का एक साथ होना डॉ० कुमार विश्वास कहलाता है। देशभर में तो उसका जादू सर चढ़कर बोलता ही है, मैंने विदेशों में भी ऐसे श्रोता देखे हैं, जिन्हें उसके पूरे-पूरे गीत याद हैं। बाजार की भाषा में कहे तो वो इस पीढ़ी का एकमात्र I.S.O. कवि है।\\n\\n- हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा\\n\u0026quot;}\" data-sheets-userformat='{\"2\":14845,\"3\":{\"1\":0,\"3\":1},\"5\":{\"1\":[{\"1\":2,\"2\":0,\"5\":{\"1\":2,\"2\":0}},{\"1\":0,\"2\":0,\"3\":3},{\"1\":1,\"2\":0,\"4\":1}]},\"6\":{\"1\":[{\"1\":2,\"2\":0,\"5\":{\"1\":2,\"2\":0}},{\"1\":0,\"2\":0,\"3\":3},{\"1\":1,\"2\":0,\"4\":1}]},\"7\":{\"1\":[{\"1\":2,\"2\":0,\"5\":{\"1\":2,\"2\":0}},{\"1\":0,\"2\":0,\"3\":3},{\"1\":1,\"2\":0,\"4\":1}]},\"8\":{\"1\":[{\"1\":2,\"2\":0,\"5\":{\"1\":2,\"2\":0}},{\"1\":0,\"2\":0,\"3\":3},{\"1\":1,\"2\":0,\"4\":1}]},\"9\":0,\"10\":1,\"11\":4,\"14\":{\"1\":3,\"3\":1},\"15\":\"Calibri\",\"16\":11}' data-mce-fragment=\"1\"\u003eकुमार विश्वास के गीत 'सत्यम् शिवम् सुंदरम् के सांस्कृतिक दर्शन की काव्यगत अनिवार्यता का प्रतिपदान करते हैं। कुमार के गीतों में भावनाओं का जैसा सहज, कुंठाहीन प्रवाह है, कल्पनाओं का, जैसा अभीष्ट 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मार्क्सवाद के राजनीतिक दर्शन से गहरे जुड़े थे लेकिन उन्होंने बराबर अपने आपको एक प्रवासी और अराजक ही समझा।\\n\\nजॉन एलिया को उर्दू के साथ-साथ अरबी, अंग्रेज़ी, फ़ारसी, संस्कृत और हिब्रू भाषा की अच्छी जानकारी थी। उनके बारे में शायर पीरजादा कासिम का कहना है, \\\u0026quot;भाषा को लेकर जॉन बहुत ख़ास रुख अख्तियार करते थे। उनकी भाषा की जड़ें क्लासिकल परम्परा में हैं लेकिन वे अपनी कविता और शायरी के लिए हमेशा नये विषयों को अपनाने से भी नहीं चूके। जॉन ताउम्र एक आदर्श की खोज में लगे रहे लेकिन दुर्भाग्यवश उसे पा न सके जिसके कारण उनके भीतर एक अजीब असन्तोष और खिन्नता घर कर गयी। उन्हें लगता रहा कि उन्होंने अपना हुनर और प्रतिभा यूँ ही जाया कर दिया है।\\\u0026quot;\\n\\nजॉन एलिया की कविता और शायरी की प्रमुख कृतियों में शुमार हैं- 'शायद' (1991), 'यानी' (2003), 'गुमान' (2006) और 'गोया' (2008)। उन्होंने अरबी और फ़ारसी भाषा से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अनुवाद भी किये हैं। यह उनके अनुवाद की मौलिकता ही कही जायेगी कि अरबी-फ़ारसी की मूल कृतियों का अनुवाद करते हुए उन्होंने उर्दू भाषा के कई नये शब्दों का आविष्कार किया है। उनकी प्रमुख अनूदित कृतियाँ हैं : 'मसीह-ए-बगदाद हल्लाज', 'ज्योमेट्रिया',\\n\\n'तवासिन', 'इसागोजी', 'रहीश-ओ-कुशैश' और 'रसल अख़्वान-उस-सफ़ा' । 'फरनूद' (2012) जॉन एलिया के विचारप्रधान लेखों का संकलन है जिसमें 1958 और 2002 के बीच लिखे गये निबन्ध और लेख शामिल हैं। इन लेखों में जॉन ने राजनीति, संस्कृति, इतिहास, भाषाशास्त्र जैसे विविध विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये हैं। 'फरनूद' में अदबी जर्नल 'इंशा' (जिसका सम्पादन वे खुद करते थे), 'आलमी डाइजेस्ट' और ज़िन्दगी के आख़िरी दौर में 'सस्पेंस डाइजेस्ट' के लिए लिखे गये निबन्धों का संकलन किया गया है।\\n\\nनिधन : 8 नवम्बर 2002\\n\\n܀܀܀\\n\\nडॉ. कुमार विश्वास - \\n\\nडॉ. कुमार विश्वास का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में, 10 फ़रवरी 1970 को वसन्त पंचमी के दिन जन्म हुआ।\\n\\nकलावादी माँ का लयात्मक लोकज्ञान व प्राध्यापक पिता का भयात्मक अनुशासन साथ-साथ मिले। इंजीनियरिंग से लेकर प्रादेशिक सेवा तक और कामू से लेकर कामशास्त्र तक, थोक में भटके, पर अटके सिर्फ साहित्य पर।\\n\\nआईआईटी से लेकर आईटीआई तक और कुलपतियों से लेकर कुलियों तक, उनके चाहने वालों की फेहरिस्त भारत की लोकतान्त्रिक समस्याओं जैसी विविध व अन्तहीन है। वे टीवी की रंगीन स्क्रीन से लेकर एफएम रेडियो के माइक्रो स्पीकर तक हर जगह सुनाई-दिखाई देते हैं। करोड़ों युवा उनसे प्रेरणा पाते हैं और साहित्य को विस्तार देने के सुपथ पर बढ़ते हैं।\\n\\nप्रकाशित कृतियाँ : अब तक आपकी चार पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं-इक पगली लड़की के बिन (1996), कोई दीवाना कहता है (2007), फिर मेरी याद (2019) और वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित शोध पुस्तक ब्रज व कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना (2021)1\\n\\nसम्पादन : शायर जॉन एलिया की चार पुस्तकें : मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ, गुमान, लेकिन व यानी।\u0026quot;}\" 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ख़ुद को पैग़म्बर मुहम्मद की वंश-परम्परा से सम्बद्ध सैयदों का वंशज कहा करते थे। उन्होंने इस्लामी न्यायशास्त्र के 'देवबन्द स्कूल' में अध्ययन किया था। इस एक तथ्य के अलावा उन्होंने कभी भी अपने आप को धर्म या सम्प्रदाय से नहीं जोड़ा। हालाँकि शुरुआती नापसन्दगी के बावजूद भी वे मार्क्सवाद के राजनीतिक दर्शन से गहरे जुड़े थे लेकिन उन्होंने बराबर अपने आपको एक प्रवासी और अराजक ही समझा।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eजॉन एलिया को उर्दू के साथ-साथ अरबी, अंग्रेज़ी, फ़ारसी, संस्कृत और हिब्रू भाषा की अच्छी जानकारी थी। उनके बारे में शायर पीरजादा कासिम का कहना है, \"भाषा को लेकर जॉन बहुत ख़ास रुख अख्तियार करते थे। उनकी भाषा की जड़ें क्लासिकल परम्परा में हैं लेकिन वे अपनी कविता और शायरी के लिए हमेशा नये विषयों को अपनाने से भी नहीं चूके। जॉन ताउम्र एक आदर्श की खोज में लगे रहे लेकिन दुर्भाग्यवश उसे पा न सके जिसके कारण उनके भीतर एक अजीब असन्तोष और खिन्नता घर कर गयी। उन्हें लगता रहा कि उन्होंने अपना हुनर और प्रतिभा यूँ ही जाया कर दिया है।\"\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eजॉन एलिया की कविता और शायरी की प्रमुख कृतियों में शुमार हैं- 'शायद' (1991), 'यानी' (2003), 'गुमान' (2006) और 'गोया' (2008)। उन्होंने अरबी और फ़ारसी भाषा से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अनुवाद भी किये हैं। यह उनके अनुवाद की मौलिकता ही कही जायेगी कि अरबी-फ़ारसी की मूल कृतियों का अनुवाद करते हुए उन्होंने उर्दू भाषा के कई नये शब्दों का आविष्कार किया है। उनकी प्रमुख अनूदित कृतियाँ हैं : 'मसीह-ए-बगदाद हल्लाज', 'ज्योमेट्रिया',\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e'तवासिन', 'इसागोजी', 'रहीश-ओ-कुशैश' और 'रसल अख़्वान-उस-सफ़ा' । 'फरनूद' (2012) जॉन एलिया के विचारप्रधान लेखों का संकलन है जिसमें 1958 और 2002 के बीच लिखे गये निबन्ध और लेख शामिल हैं। इन लेखों में जॉन ने राजनीति, संस्कृति, इतिहास, भाषाशास्त्र जैसे विविध विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये हैं। 'फरनूद' में अदबी जर्नल 'इंशा' (जिसका सम्पादन वे खुद करते थे), 'आलमी डाइजेस्ट' और ज़िन्दगी के आख़िरी दौर में 'सस्पेंस डाइजेस्ट' के लिए लिखे गये निबन्धों का संकलन किया गया है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eनिधन : 8 नवम्बर 2002\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e܀܀܀\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eडॉ. कुमार विश्वास -\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eडॉ. कुमार विश्वास का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में, 10 फ़रवरी 1970 को वसन्त पंचमी के दिन जन्म हुआ।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eकलावादी माँ का लयात्मक लोकज्ञान व प्राध्यापक पिता का भयात्मक अनुशासन साथ-साथ मिले। इंजीनियरिंग से लेकर प्रादेशिक सेवा तक और कामू से लेकर कामशास्त्र तक, थोक में भटके, पर अटके सिर्फ साहित्य पर।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eआईआईटी से लेकर आईटीआई तक और कुलपतियों से लेकर कुलियों तक, उनके चाहने वालों की फेहरिस्त भारत की लोकतान्त्रिक समस्याओं जैसी विविध व अन्तहीन है। वे टीवी की रंगीन स्क्रीन से लेकर एफएम रेडियो के माइक्रो स्पीकर तक हर जगह सुनाई-दिखाई देते हैं। करोड़ों युवा उनसे प्रेरणा पाते हैं और साहित्य को विस्तार देने के सुपथ पर बढ़ते हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eप्रकाशित कृतियाँ : अब तक आपकी चार पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं-इक पगली लड़की के बिन (1996), कोई दीवाना कहता है (2007), फिर मेरी याद (2019) और वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित शोध पुस्तक ब्रज व कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना (2021)1\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eसम्पादन : शायर जॉन एलिया की चार पुस्तकें : मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ, गुमान, लेकिन व यानी।\u003c\/span\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44704582533357,"sku":null,"price":290.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/products\/gQyhG3CJoJ.jpg?v=1703917715"},{"product_id":"koi-deewana-kehta-hai-combo-set","title":"Koi Deewana Kehta Hai Combo Set","description":"\u003cp\u003e\"कोई दीवाना कहता है कॉम्बो सेट\" एक साहित्यिक अभियांता कुमार विश्वास के साक्षात्कारपूर्ण संग्रह को दर्शाता है, जिसमें शामिल हैं तीनों प्रसिद्ध किताबें - \"कोई दीवाना कहता है\", \"फिर मेरी याद\", और \"ब्रज व कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना\"। यह सेट कुमार विश्वास की उदार और भावनात्मक कविताओं का संग्रह है जो पठने वाले को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है। \"कोई दीवाना कहता है\" कविता संग्रह है जो प्रेम, आशा, और जीवन के रंग-बिरंगे पलों को सुंदरता से छूने का प्रयास करता है। \"फिर मेरी याद\" में, कुमार विश्वास अपनी अद्वितीय भाषा में महकती यादों को जीवंत करते हैं, जो पठने वाले को भावनात्मक अनुभव का आनंद देते हैं। \"ब्रज व कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना\" में कुमार विश्वास लोकसाहित्य के माध्यम से जनसामाजिक मुद्दों और साहित्यिक विरासत को छूने का प्रयास करते हैं। यह सेट एक संपूर्ण साहित्यिक अनुभव को पूरा करता है, जो कुमार विश्वास के कलम से निकला है और पठकों को साहित्यिक सफलता का अहसास कराता है।\u003c\/p\u003e\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\u003ca href=\"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/koi-deewana-kahta-hai\"\u003eकोई दीवाना कहता है\u003c\/a\u003e\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\u003ca href=\"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/phir-meri-yaad-1\"\u003eफिर मेरी याद\u003c\/a\u003e\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\u003ca href=\"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/braj-va-kauravi-lokgeeton-mein-lokchetna-1\"\u003eब्रज व कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना\u003c\/a\u003e\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Default 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